1962 में भारत-चीन के युद्ध मे इजराइल चीन को बर्बाद करने के लिए भारत के साथ था तैयार, लेकिन नेहरू ने…

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1962 के दशक में हुए चीन भारत के युद्ध में भी इसराइल भारत की मदद करने के लिए पूरी तरह से त्यार था, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनके सामने कुछ ऐसी शरते रख दी जिनकी वजह से हम जीता हुआ युद्ध भी हार गए और इस युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई भारत आज तक कर रहा है!

1962 में भी चीन ने भारत पर धोके से हमला किया था उस समय इस युद्ध से निपटने के लिए इसराइल ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया था लेकिन उस समय के हमारे प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसराइल के सामने शरत रख दी की इसराइल युद्ध में अपने किसी भी विमान पर अपना झंडा लगा क्र नहीं लाएगा और न ही वह अपने किसी हथियार पर इसराइल की मार्किंग करेगा।

इसराइल का प्रधानमंत्री का उस समय युद्ध में मदद के लिए इन शर्तो के बाद मना करना स्वभाविक हैऔर कोई देश भी उनकी जगह होता तो वह भी इन शर्तो को सुनकर मदद के लिए मना ही करता। अगर नेहरू ने सीए शर्ते न रखी होती तो 1962 का युद्ध आज हम जीत चुके होते। उस समय कुछ नेहरू जी भी परेशानियों में फसे हुए थे क्यूंकि उस समय भारत के प्रधानमंत्री के साथ साथ रक्षामंत्री ,वित्तमंत्री के साथ साथ पूरी कैबिनेट खुद ही थे।

अगर 1962 के भारत चीन युद्ध में अगर नेहरू जी शर्ते न रखते तो भारत को इसराइल से युद्ध में मदद मिल जाती और फिर भारत की इस युद्ध में जीत पक्की थी। और फिर न ही इस युद्ध की वजह से भारत के इतने जवान शाहिद होते।