“झूठा एजेंडा मत फैलाओ”, भूटान-भारत की दोस्ती में दरार डालने की कोशिश करने वालों को भूटान ने धोया

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कांग्रेस पार्टी और लुटियंस मीडिया एक बार फिर से पीएम मोदी को नीचा दिखाने के नाम पर भारत को बदनाम करने चली है। भारतीय मीडिया ने ये खबर फैलाने का प्रयास किया कि कैसे पीएम मोदी की कूटनीति धाराशायी हो गई है और भारत पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुका है। इसके लिए अब उन्होंने भूटान को अपनी ढाल बनाने का प्रयास किया है, और ये दावा किया कि अब वो असम का पानी रोक रहे हैं। परंतु यह फेक न्यूज़ जितनी जल्दी फैली थी, उतनी ही जल्दी ध्वस्त हो गई, क्योंकि पानी का बहाव प्राकृतिक कारणों से रुका हुआ था। भूटान तो काफी सक्रिय होकर इस समस्या को सुलझाने में लगा हुआ है।

इस समस्या का फायदा उठाते हुए कई न्यूज़ चैनलों ने ये भ्रम फैलाना शुरू कर दिया कि भूटान अब भारत के साथ दादागिरी कर रहा है। टाइम्स नाउ ने आईएएनएस का एक आर्टिकल शेयर करते हुए कहा, “चीन के मित्र देश पाकिस्तान और नेपाल के बाद अब भूटान ने अभी आँखें तरेरनी शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि गुवाहाटी में किसानों ने भूटान द्वारा पानी रोके जाने के विरुद्ध प्रदर्शन करना शुरू किया है। जिस स्त्रोत से पानी आता है, उसका उपयोग भूटान और भारत के किसान 1953 से कर रहे हैं।”

इस लेख ने यहाँ तक दावा किया कि इस कृत्य से 25 गांवों की रोज़ी रोटी खतरे में आ गई है। इस लेख में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया था कि कैसे चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भारत को अलग-थलग करने पर लगा हुआ है।

इसी प्रकार से ईस्ट मोजो ने अपने लेख में लिखा“अब भूटान ने असम से सटे सीमा पर किसानों के लिए कृषि योग्य जल के प्रवाह को रोक दिया। चीन और नेपाल के बाद अब भूटान 1953 से सक्रिय irrigation कैनाल को रोक चुका है, जिससे भारतीय खेमे में 6000 से अधिक किसानों को नुकसान होगा”। इसके अलावा ईस्ट मोजो ने ये भी लिखा, “इस कैनाल के अचानक बंद होने से भूटान सरकार ने भारतीय खेमे में रोष पैदा कर दिया है”।

अब लगे हाथ ऐसा प्रोपगैंडा मिल रहा हो, और कांग्रेस हाथ न साफ करे, ऐसा हो सकता है क्या? कर्नाटक कांग्रेस ने तुरंत उछलते हुए इस खबर का प्रोपेगेंडा के रूप में इस्तेमाल करते हुए ट्वीट किया, “भूटान ने हमारे किसानों को मिलने वाला पानी रोक दिया। हमारी विदेश नीति में कुछ तो गड़बड़ है”।

फिर क्या था, कांग्रेस के चाटुकारों ने इस फेक न्यूज़ को बढ़ा-चढ़ाकर बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी ।

पर सच्चाई तो कुछ और ही निकली। मानसून सीजन के कारण भूटान में काफी बाढ़ आ गयी थी, जिसके कारण कृषि संबन्धित कई कैनाल ब्लॉक हो गए थे। भूटान ने स्वयं इसके बारे में भारत को सूचित किया है और भूटानी प्रशासन इस समस्या को सुलझाने के लिए जी जान से लगा हुआ है। भूटान के वित्त मंत्री ने फेसबुक पर स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया“हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि अपने भारतीय साथियों को अनवरत कृषि उपयोग के लिए जलापूर्ति को सुचारु रूप से बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं”। यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि भूटान के वित्त मंत्री  ने पड़ोसी सम्बन्धों पर विशेष ध्यान देते हुए कहा कि भूटान और भारत के बीच मित्रता बनी रहनी चाहिए।

असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने भी ट्विटर पर इस फेक न्यूज़ को ध्वस्त किया।

एक बार फिर कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम ने मोदी सरकार के कूटनीति पर प्रश्न चिन्ह लगाने का प्रयास किया, परंतु भूटान ने कांग्रेस के एजेंडे को तार-तार करते हुए ये सिद्ध किया कि उनकी और भारत की मित्रता को किसी की आंच नहीं लगने दी जाएगी।