भारत-चीन तनाव पर ब्रिटेन की बारीकी से नजर: पीएम बोरिस

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नई दिल्‍ली:भारत और चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक मोम्‍पिओ ने तो यहां तक कहा दिया है कि चीनी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की हरकतों को देखते हुए अमेरिका ने अपनी सैन्‍य शक्‍ति को चीन के आसपास तैनात करने का निर्णय किया है। अब ऐसा ही कुछ बयान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का आया है।

पूर्वी लद्दाख में तनाव को “एक बहुत गंभीर और चिंताजनक स्थिति” के रूप में वर्णित करते हुए ब्रिटेन ने उसपर बारीकी से निगरानी करने की बात कही। यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री ने भारत और चीन को अपनी सीमा के मुद्दों को बातचीत से सुलझाने की बात कही। उन्होंने बुधवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में अपने साप्ताहिक प्रधानमंत्री के सवालों (पीएमक्यू) पर बोलते हुए इस मामले पर अपना पहला आधिकारिक बयान दिया।

कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद फ्लिक ड्रमंड से जब पूछा गया कि एक तरफ “राष्ट्रमंडल सदस्य और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच विवाद है और दूसरी तरफ एक राज्य जो हमारी धारणा को चुनौती देता है। यह ब्रिटिश हितों के लिए निहितार्थ है। यूके के पीएम ने कहा पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की तरफ से सेना की वृद्ध‍ि “एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक स्थिति” है, जिसकी ब्रिटेन “बारीकी से निगरानी” कर रहा है।

बोरिस जॉनसन ने कहा, “शायद सबसे अच्छी बात जो मैं कह सकता हूं, वह यह है कि हम दोनों पक्षों को सीमा पर मुद्दों पर बातचीत और उनके बीच इसे सुलझाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।” मंगलवार  को गलवान में हुई हिंसक झड़प और संघर्ष के अन्य बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए सीमा के चीनी पक्ष पर भारत और चीन के बीच शीर्ष सैन्य वार्ता में आपसी सहमति बनाने के लिए बात हुई थी। सेना के सूत्रों ने कहा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में हुई।

सूत्रों ने कहा, ‘पूर्वी लद्दाख में सभी तनाव वाले क्षेत्रों से होने वाले विस्थापन के विवरण पर चर्चा की गई और दोनों पक्षों द्वारा इसे आगे बढ़ाया जाएगा।’ चीनी सेना की ओर से चुशूल में लेफ्टिनेंट जनरल-स्तर पर आयोजित किया गया था। पिछली बार इस स्तर पर एक बैठक 6 जून को आयोजित की गई थी, जब भारत व चीन तनाव और निर्माण के हफ्तों के बाद डी-एस्केलेट करने के प्रयासों में सैनिकों को वापस खींचने पर सहमत हुए थे। उस बैठक के बाद दोनों ओर से मतभेद खत्‍म करने की शुरुआत हुई थी, जिसमें चीनी और भारत दोनों ने सैनिकों को पीछे खींच लिया था। लेकिन 15 जून को दोनों पक्षों के बीच 1967 के बाद से सबसे खराब सीमा टकराव हुआ।