अब पाकिस्तान को धूल चटानी है, तो स्टरलाइट खोलना ही पड़ेगा”, वेदांता के CEO ने PM मोदी को लिखा पत्र

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से लोकल के लिए वोकल और “आत्मनिर्भर” बनने की बात कही थी। कोरोना के बाद अगर देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाना है, तो उसका यही एकमात्र रास्ता है। इसी बीच वेदांता ग्रुप के CEO अनिल अग्रवाल ने पीएम मोदी से अपील की है कि वर्ष 2018 में तमिलनाडु सरकार द्वारा बंद किए गए तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट कॉपर प्लांट को दोबारा शुरू करने को लेकर कदम उठाएँ। उन्होंने PM मोदी को पत्र लिखकर यह भी कहा है कि स्टरलाइट के बंद होने के बाद पाकिस्तान लगातार अंतर्राष्ट्रीय कॉपर मार्केट में जगह बनाता जा रहा है। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इस मामले में हस्तक्षेप करके बंद पड़े इस कॉपर प्लांट को दोबारा शुरू करने पर विचार करना चाहिए।

बता दें कि वर्ष 2018 में तमिलनाडु में कुछ फर्जी पर्यावरणविदों ने स्टरलाइट कॉपर प्लांट के खिलाफ सुनियोजित एजेंडा फैलाकर जमकर विरोध प्रदर्शन करवाए थे, जिसके बाद राज्य सरकार को इसे बंद करने के आदेश जारी करने पड़े थे। अब इसी के खिलाफ अनिल अग्रवाल ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में लिखा है “कॉपर एक्सपोर्ट बंद होने से देश को अब कॉपर इम्पोर्ट करना पड़ रहा है जिससे देश को हर साल 40 हज़ार करोड़ का नुकसान हो रहा है। साथ ही पाकिस्तान का कॉपर बाज़ार लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में हजारों लोग बेरोजगार हो गए। ऐसे में अगर हमें भारत सरकार को “सबका-साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास” के नारे को मजबूत करना है, तो केंद्र सरकार को बंद पड़ चुके इस कॉपर प्लांट को दोबारा शुरू करने के लिए कदम उठाने चाहिए। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगा”।

वर्ष 2018 में स्टरलाइट के बंद होने के बाद कभी कॉपर का निर्यातक होने वाला भारत 18 वर्षों में पहली बार कॉपर का इंपोर्टर देश बन गया था। लेकिन नुकसान सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, अब भारत में बंद हुए इस कॉपर प्लांट का हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा फायदा मिल रहा है, और वर्ष 2018 के बाद से पाकिस्तान के कॉपर एक्सपोर्ट में 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तीन साल पहले तक पाकिस्तान हर साल सिर्फ 106 मिलियन डॉलर का कॉपर एक्सपोर्ट ही कर रहा था, लेकिन वर्ष 2019 तक आते आते यह 550 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया, और इसका अधिकतर हिस्सा चीन को ही एक्सपोर्ट होता है। इस एक्सपोर्ट में पाकिस्तान के विवादित रेको ड़ीक प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी भूमिका है।

स्टरलाइट कॉपर प्लांट बंद होने से भारत को दो बड़े नुकसान हुए, एक तो भारत में इसका बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ, और दूसरा यह कि अब भारत के दुश्मन को इसका फायदा मिलता दिखाई दे रहा है। तूतीकोरिन स्थित स्टरलाइट प्लांट के बंद होने के चलते लगभग 4 लाख टन कॉपर का उत्पादन खत्म हो गया।

इस प्लांट के बंद होने के पीछे सबसे बड़ा हाथ विदेशी पैसों पर पलने वाले NGOs का माना गया। समय-समय पर ऐसी खबरें आती रहती हैं कि भारत में चीन द्वारा फंड किए जाने वाले NGO ही भारत में विकास-विरोधी अभियान चलाते हैं। बता दें कि स्टरलाइट कॉपर प्लांट को बंद करवाने के लिए वर्ष 2018 में बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन करवाए गए थे, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गयी थी।

माना जाता है कि इन प्रदर्शनों को चीनी कंपनियों और विदेशी एनजीओ द्वारा फंड किया जा रहा था। इतना ही नहीं, इन प्रदर्शनों में नक्सलियों ने भी प्रदर्शन किया था। कुछ प्रदर्शनकारियों के तार तो कमल हासन और चर्च से जाकर मिल रहे थे।

भारत में यह NGO गिरोह सिर्फ स्टरलाइट कॉपर प्रोजेक्ट को ही नहीं, बल्कि और भी कई प्रोजेक्ट्स की बलि ले चुका है। महाराष्ट्र के रत्नागिरि में 3 लाख करोड़ रुपयों का नानर रिफाईनरी प्रोजेक्ट से लेकर महाराष्ट्र में ही आरे मेट्रो रेल प्रोजेक्ट तक, हर जगह इन नकली पर्यावरणविदों की वजह से ही प्रोजेक्ट्स में या तो देरी देखने को मिली है, या फिर इन्हें हमेशा के लिए रद्द करना पड़ा है।

जब से राज्य में उद्धव सरकार आई है, उसके बाद से महाराष्ट्र का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और हाइपरलूप प्रोजेक्ट भी खतरे में पड़ गया है, जो कि राज्य के विकास में अपनी अहम भूमिका निभा सकते थे। इसी प्रकार ये विदेशी संगठन भारत के पूर्वोतर के राज्यों में पर्यावरण के नाम पर खदानों और कोयला प्लांट्स के खिलाफ प्रदर्शन कर भारत की विकास की गाड़ी को धीमा करने के प्रयत्न कर चुके हैं। NGO और नकली पर्यावरणविदों द्वारा चलाये जा रहे इस भारत विरोधी अभियान के खिलाफ केंद्र सरकार को सख्त रुख अपनाना ही चाहिए।

वैसे तो भारत सरकार पहले ही Foreign Contribution Regulation Act यानि FCRA के माध्यम से इन भारत-विरोधी संगठनों पर लगाम लगाने की पहल कर चुकी है, लेकिन इस दिशा में सरकार को सावधानी बरतनी रहनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत में कोई भी विकास-विरोधी NGO दोबारा भारत के विकास में कोई बाधा ना पहुंचा पाये। इसके साथ ही सरकार को अनिल अग्रवाल की बात मानकर जल्द से जल्द स्टरलाइट को दोबारा शुरू करने पर विचार करना चाहिए।