अभी-अभी: LAC पर सेना ने जाट रेजिमेंट के 6 फुट लंबे जाट सैनिक युद्ध सामग्री के साथ उतारे…

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 भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. चीनी सेना की ओर से आ रही धमकियों के बीच भारतीय सेना ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चीनी सेना को चौंका दिया है.
छोटे चीनी सैनिकों के सामने 6 फुट लंबे जाट सैनिक

 सेना ने छोटे-छोटे चीनी सैनिकों के मुकाबले में अब जुझारु तेवर वाले जाट रेजिमेंट के 6 फुट लंबे जाट सैनिक उतार दिए हैं. इसी के साथ कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी फ़ौज के परखच्चे उड़ा देने वाली बोफोर्स तोपों समेत कई अन्य बेहद घातक हथियारों को डोकलाम में तैनात किया गया है.

भारत और चीन के बीच एक समझौते के मुताबिक़ एलएसी (लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल) पर दोनों देशों को समान संख्या में सैनिक तैनात करने होते हैं. इसी कारण बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती की संख्या दोनों तरफ से बराबर ही है. हालांकि एलएसी से कुछ ही पीछे भारतीय जवान की टुकड़ियां आदेश के इन्तजार में तैयार हैं.

पहाड़ जैसे जाट सैनिकों को देख चीनी सेना में दहशत
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने 24 जुलाई को बड़बोलापन दिखाते हुए कहा था कि ‘पहाड़ को हिलाना आसान है लेकिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को नहीं.’ दरअसल ऐसा उन्होंने पहाड़ जैसे जाट सैनिकों को देख कर ही कहा होगा.

बता दें कि ब्रिटिश पत्रकार एडमंड कैंडलर ने अपनी किताब ‘द सिपॉय’ में जाट रेजिमेंट के सैनिकों के बारे में लिखा था कि, ‘जिस जगह पर इन जंग-जुझारु जवानों को तैनात कर दिया जाता है, वहां से इन्हें तभी डिगाया जा सकता है जब या तो कोई भूकंप आ जाए या कोई ज्वालामुखी फट पड़े.’

डोकलाम में जाट रेजिमेंट के लंबे-तगड़े जवानों की तैनाती के बाद से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के हाथ-पाँव और भी ज्यादा ढीले हो गए हैं. जाट जवान चीनी सैनिकों को गाजर-मूली की तरह काटने का माद्दा रखते है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के छोटे सैनिकों को अपनी गर्दन खूब ऊंची ताननी होगी तब जाकर ये सैनिक उन्हें नजर आएंगे और ऊपर से डोकलाम की भौगोलिक स्थिति भी भारतीय सेना के अनुकूल है, भारतीय सेना को पहाड़ी इलाकों के युद्ध में महारत हासिल है.

चीन की मैंडरिन भाषा जानते हैं तैनात भारतीय जवान
भारतीय सेना की ओर से डोकलाम में पहली पांत में 6 फुट लंबे जो जाट सैनिक तैनात किए गए हैं, उन सबको हथियारों के साथ एक-एक कैमेरा भी दिया गया है. जाट सैनिकों को आदेश दिए गए हैं कि चीनी सेना पर नज़रें जमाये रखें. इन जवानों को चीनी भाषा मैंडरिन भी आती है, जिससे इन्हे पता चलता है कि चीनी सैनिक आपस में क्या बातें कर रहे हैं.

यदि चीन की फ़ौज हमले की गलती करती है तो पहली पांत में तैनात ये जाट जवान चीनियों से लोहा लेते हुए हमले की खबर पिछली पांत के अपने साथी सैनिकों को पहुंचा देंगे, जो बेहद विनाशकारी हथियारों, टैंकों व् तोपों के साथ चीन सेना पर टूट पड़ने के इशारे के इंतजार में खड़े हैं.

हमला किया तो बहुत पछतायेगा चीन
दूसरी पांत के जवानों को निर्देश दिए गए हैं कि मुस्तैदी में जरा भी ढील नहीं आनी चाहिए और चीन की ओर से हमले की खबर मिलते ही, सारे हथियारों के साथ एकबारगी उस पर टूट पड़ना है. पानी पीना हो, खाना खाना हो या फिर घड़ी-दो घडी नींद लेनी हो- यहां अपने शिविर में सैनिक सबकुछ बहुत जल्दी-जल्दी करते हैं.

ट्राइ जंक्शन से 10 किलोमीटर की दूरी पर भारतीय सेना के हजारों जवान तैनात किये जा चुके हैं. एक सैनिक ने बताया कि डोकलाम घुसपैठ के दौरान सबसे पहले भारतीय सेना द्वारा वहां ब्लैककैट प्लाटून को तैनात किया गया था. बाद में नाथू ला के बेसकैंप से जाट रेजिमेंट को बुलाया गया.

बताया जा रहा है कि चीन भले ही अपने गाल बजा रहा हो लेकिन भारतीय सेना भी चुपचाप पूरी तैयारियां कर रही है. नए बंकर बनाये गए हैं. चीनी सैनिकों के हमले को नाकाम करने के लिए जमीनी तैयारी की गई है. सामरिक दृष्टि से अहम् जगहों पर मशीनगन का पूरा जाल बिछा दिया गया है और जवान दिन में दो बार ड्रिल कर रहे हैं.