कांग्रेस को लात मार कर पायलट आसानी से BJP में शामिल हो सकते थे, लेकिन वो बड़ा Game खेल रहे हैं

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राजनीति में कांग्रेस के बुरे दिनों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश में अपनी सरकार खोने के बाद राजनीतिक आग सुलगते-सुलगते राजस्थान की दहलीज तक आ पहुंची है। यहाँ मुख्य भूमिका में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट हैं। सचिन पायलट और गहलोत के बीच तकरार इतनी बढ़ चुकी है कि कांग्रेस को अब सचिन पायलट और उनके करीबियों को पार्टी के सभी पदों से बर्खास्त करना पड़ा है। पार्टी हाईकमान अशोक गहलोत के साथ खड़ी है, और ऐसे में पायलट को अपनी लड़ाई लड़ने के लिए अकेले छोड़ दिया गया है। पायलट ऐसी स्थिति में क्या करेंगे? उनके पास तीन विकल्प अभी मौजूद हैं।

पायलट के पास पहला विकल्प यह है कि वे हाई-कमान की बात मान लें और अपने घुटने टेक लें, जो कि पायलट कभी नहीं करेंगे। उनके पास दूसरा विकल्प यह है कि वे अपने समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो जाएँ और अशोक गहलोत की सरकार गिरा दें। इसके अलावा पायलट के पास अपनी खुद की पार्टी खड़ा करने का भी विकल्प मौजूद है। कुछ राजनीतिक expert इस बात की कयास लगा रहे हैं कि पायलट BJP को जॉइन कर सकते हैं। लेकिन सचिन पायलट ANI को एक बयान देते हुए यह साफ़ कर चुके हैं कि वे बीजेपी को जॉइन नहीं करेंगे। यानि सचिन पायलट के मन में कुछ और ही चल रहा है और उनकी रणनीति आने वाले समय में कांग्रेस को बड़ा झटका दे सकती है।

दरअसल, सचिन पायलट की स्थिति की अगर हरियाणा के चौटाला परिवार से तुलना की जाये, तो पिक्चर थोड़ी ज़्यादा क्लियर हो सकती है। हरियाणा में मौजूदा पार्टी JJP को चौटाला परिवार के युवा नेता दुष्यंत सिंह चौटाला ने इनेलो को दो भागों में बांटकर बनाया था। बीते वर्ष हुए हरियाणा के विधानसभा चुनावों में ओम प्रकाश चौटाला और उनके छोटे बेटे अभय चौटाला के नेतृत्व वाली इनेलो को 90 में से सिर्फ 1 सीट मिली, तो वहीं दुष्यंत सिंह चौटाला के नेतृत्व में JJP को 10 सीट मिली। दुष्यंत इनेलो का सारा वोट शेयर खा गए। बाद में दुष्यंत ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

अब राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट भी ठीक ऐसा ही कर सकते हैं। वे अपनी अलग पार्टी के साथ जब राजस्थान के चुनावों में उतरेंगे तो वे कांग्रेस के वोट शेयर को दो हिस्सों में बांटने का काम करेंगे। इससे सबसे बड़ा फायदा BJP को होगा। इसके अलावा राजस्थान में सचिन पायलट की लोकप्रियता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वे आसनी से कांग्रेस को मात देकर अच्छी-ख़ासी सीटों पर अपनी पार्टी का कब्जा जमा लेंगे। अगर आगामी राजस्थान के चुनावों में त्रिकोणीय मुक़ाबला हुआ, और कोई भी पार्टी बहुमत हासिल करने में कामयाब ना हुई तो पायलट BJP के समर्थन से CM की कुर्सी तक पहुँच जाएंगे।

अगर पायलट अब BJP में शामिल हो जाते हैं, तो BJP शायद ही उन्हें CM का पद दे। ऐसे में अपनी अलग पार्टी के जरिये ही पायलट CM की कुर्सी तक पहुँच सकते हैं। BJP में शामिल न होना सचिन पायलट की लंबी और दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है।

पायलट की यह दूरदर्शी रणनीति राजस्थान में कांग्रेस का वही हाल कर सकती है जो JJP ने हरियाणा में इनेलो का कर दिया। आज हरियाणा की राजनीति में इनेलो एक निष्प्रभावी पार्टी बनकर रह गयी है, जिसका वोटर बेस JJP ने पूरी तरह निगल लिया है। कांग्रेस के साथ भी सचिन पायलट यही करने वाले हैं।  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात को भली-भांति जानते हैं और इसीलिए वे भी सचिन पायलट की नाराजगी को कांग्रेस पार्टी के लिए बहुत बुरा बता रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस को अपनी सोच बदलने की नसीहत दी।

बिश्नोई ने अपने एक बयान में कहा “कांग्रेस हाईकमान से प्रार्थना है, जैसे सिंधिया चले गए, उससे जबरदस्त नुकसान पार्टी को हुआ। मैंने उस वक्त भी कहा था। आज सचिन पायलट के बारे में ऐसी अफवाहें सुन रहे हैं। अगर ये अफवाहें हैं तो कोई बात नहीं है। अगर ये सच है तो कांग्रेस पार्टी को हर हालत में सचिन को मनाना चाहिए। सचिन एक कद्दावर नेता हैं, उनके जाने से पार्टी को नुकसान होगा। ऐसे ही बहुत से नेता है, जो कांग्रेस पार्टी को मजबूती देना चाहते हैं। कांग्रेस को उनको आगे लेकर आना चाहिए। कांग्रेस को अपनी सोच बदलनी पड़ेगी”।

इसी प्रकार पायलट की स्थिति पर कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व नेता और BJP में शामिल होने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपना दुख प्रकट किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी में “योग्यता” की कोई जगह नहीं है।

पायलट का कांग्रेस छोड़कर जाना राजस्थान कांग्रेस की ताबूत में आखिरी कील का काम कर सकती है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी से मिली निराशा के बाद जिस तरह से अपनी आवाज उठाकर और बीजेपी में न शामिल होने का फैसला सचिन पायलट ने लिया है वो सराहनीय है। आगे चलकर यदि वो नयी पार्टी बनाते हैं तो कांग्रेस के कई नेता उनका साथ देने के लिए मैदान में दिखाई दे तो किसी को इसमें कोई हैरानी नहीं होगी, परंतु इससे सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस पार्टी को ही होगा। स्पष्ट है अब राजस्थान का ये राजनीतिक खेल आने वाले दिनों में और क्या नए ट्विस्ट और टर्न लेकर आता है उसे देखना दिलचस्प होगा।