अभी अभीः देश के वैज्ञानिकों की बडी चेतावनी, आने वाली है भारी तबाही?

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नई दिल्ली. भूकंप विज्ञानियों की चिंता एक बड़े हिमालयी भूकंप को लेकर लगातार बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय से इस इलाके में आने वाला है और उन्होंने इसे लेकर शिमलाजैसे पहाड़ी शहरों के साथ ही नई दिल्ली जैसे मैदानी शहरों को भी चेतावनी दी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बड़े भूकंप के लिए ये शहर तैयार नहीं हैं.

हिमालय (Himalaya) में आये पिछले बड़े झटके 2015 में नेपाल भूकंप (Nepal Earthquake) के दौरान आये थे. 7.8 तीव्रता वाले इस भूकंप (Earthquake) से 9 हजार लोगों की जान गई थी और 22 हजार लोग घायल हुए थे. इस भूकंप ने नेपाल की राजधानी काठमांडू (Kathmandu) के ज्यादातर हिस्से को समतल कर दिया था.

2015 के नेपाली भूकंप की भारतीय प्लेट-यूरेशियन प्लेट में विलय थी वजह

एक अंग्रेजी अखबार में छपे एक लेख के मुताबिक यह भूकंप इतना तेज था कि इसने राजधानी काठमांडू को 1.5 मीटर दक्षिण में खिसका दिया था. हालांकि यह उतना भी तेज नहीं था क्योंकि इस इलाके में 8 से ज्यादा तीव्रता वाले एक भूकंप का अनुमान लगाया जा रहा था. हालांकि इसने एक और भूकंप के लिए जमीन तैयार कर दी थी, जिसके इससे ज्यादा तीव्र होने की संभावना थी.

भूकंप विज्ञानी इस बात को लेकर निश्चित नहीं हैं कि यह बड़ा भूकंप कब आयेगा. यह जल्द ही आ सकता है और कुछ 100 सालों के अंदर भी. लेकिन वे जोर देते हैं कि चाहे ये जल्द ही आये या बाद में देश को इसके लिए तैयार रहना चाहिये

2015 में आया नेपाल भूकंप भारतीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट से चल रहे टेक्टॉनिक विलय के फलस्वरूप आया था. हिमालय की तीन मुख्य फॉल्ट लाइन में टेक्टॉनिक गतिविधि से जबरदस्त खिंचाव पड़ता है.

ये होगी 8 से ज्यादा तीव्रता के इस संभावित भूकंप के आने की वजह

दुर्भाग्यवश मानव जनसंख्या के लिए यह खतरनाक है लेकिन इस पड़ने वाले खिंचाव और तनाव को कम करने के लिए भूकंप ही सबसे प्रभावशाली तरीका है. जो खिंचाव और तनाव बना हुआ है, वैज्ञानिक मानते हैं कि यदा-कदा 8 की तीव्रता या उससे अधिक से आने वाला बड़ा भूकंप ही उसे खत्म कर सकता है.

कोऑपरेटिव इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन इनवायरमेंटल सांइसेस, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलरॉडो के एक भूगर्भविज्ञानी रोजर बिलहैम एक रिव्यू पेपर में लिखते हैं कि पिछले 50 सालों से, यहां पर कोई भी 8 या उससे अधिक रिक्टर तीव्रता का कोई पर्याप्त बड़ा भूकंप नहीं आया है ताकि हिमालयी चाप के बड़े इलाके में आए खिंचाव को खत्म किया जा सके.